भारी कांवड़, तेज आवाज वाले डीजे और अस्त्र-शस्त्र से बचने की सलाह, प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का किया आग्रह
हरिद्वार। कांवड़ यात्रा के मद्देनजर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्माओं ने शिवभक्तों से श्रद्धा, अनुशासन और शांति के साथ यात्रा संपन्न करने की अपील की है। संतों ने कहा कि कांवड़ यात्रा भगवान शिव और मां गंगा की आराधना का पावन पर्व है, जिसकी धार्मिक गरिमा और पवित्रता बनाए रखना प्रत्येक श्रद्धालु का नैतिक दायित्व है।
संतों ने श्रद्धालुओं से आवश्यकता के अनुसार ही गंगाजल लेने और अत्यधिक भारी कांवड़ या बड़े जलपात्रों का उपयोग न करने की सलाह दी। उनका कहना है कि भारी कांवड़ उठाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए यात्रा को सरल और सुरक्षित रखना आवश्यक है।
स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने की अपील
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि हरिद्वार की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना सभी शिवभक्तों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से ध्वनि प्रदूषण से बचने, पारंपरिक भक्ति गीतों और वाद्ययंत्रों के साथ यात्रा करने तथा अनुशासन का पालन करने का आह्वान किया।
डीजे और हथियारों से दूर रहें श्रद्धालु
निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान तेज आवाज वाले डीजे, धारदार हथियार और किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह यात्रा आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है, इसलिए इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
प्रशासन के निर्देशों का करें पालन
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने भी श्रद्धालुओं से संयमित, सुरक्षित और अनुशासित यात्रा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी शिवभक्त शांतिपूर्वक हरिद्वार पहुंचें, विधि-विधान से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कांवड़ यात्रा को सफल और आदर्श बनाने में सहयोग दें।
संतों ने विश्वास व्यक्त किया कि श्रद्धा, अनुशासन और आपसी सहयोग के साथ संपन्न होने वाली कांवड़ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करेगी, बल्कि समाज में सद्भाव और सकारात्मक संदेश भी देगी।

