Thursday, August 6, 2026
Google search engine
Homeराज्य समाचारनई दिल्लीविश्व संस्कृत दिवस से पहले उत्तराखण्ड की बड़ी पहल, संस्कृत को मिला...

विश्व संस्कृत दिवस से पहले उत्तराखण्ड की बड़ी पहल, संस्कृत को मिला वैश्विक मंच

विश्व संस्कृत दिवस से पूर्व, उत्तराखण्ड ने वैश्विक स्तर पर संस्कृत के प्रसार को दिया नया आयाम।

सचिव, संस्कृत शिक्षा, दीपक कुमार ने नई दिल्ली में इंडोनेशिया गणराज्य के दूतावास में कार्यवाहक राजदूत युधो सासोंगको से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान संस्कृत तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के वैश्विक प्रसार हेतु उत्तराखण्ड और इंडोनेशिया के मध्य शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संस्कृत को अपनी द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान करने, संस्कृत के संवर्धन एवं प्रचार के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं देववाणी संस्कृत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में विश्व की सबसे प्राचीन एवं प्रभावशाली भाषा संस्कृत अब भारत की सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक शिक्षाविदों के बीच अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ रही है। राज्य के प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम की स्थापना की गई है। मात्र एक वर्ष की अल्प अवधि में इन   संस्कृत ग्रामों ने, स्थानीय समुदायों में संस्कृत सीखने तथा भारत की दार्शनिक, सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत से पुनः जुड़ने में उल्लेखनीय पहल की है।
सचिव, संस्कृत शिक्षा, दीपक कुमार ने बताया कि राज्य में संस्कृत आयोग के गठन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इस संबंध में देशभर से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिन्हें विश्व संस्कृत दिवस से पूर्व 10 अगस्त तक उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय को प्रेषित किये जाने की योजना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इंडोनेशिया के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित होने से संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा का व्यापक प्रसार होगा तथा दोनों देशों के युवा अपनी साझा सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को और अधिक गहराई से समझ सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इंडोनेशियाई भाषा में संस्कृत मूल के अनेक शब्द आज भी प्रचलित हैं, जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों का सशक्त प्रमाण हैं। विगत माह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उल्लेख किया था कि इंडोनेशियाई भाषा का लगभग 50 प्रतिशत भाग संस्कृत से प्रभावित है। यह तथ्य भारत और इंडोनेशिया के बीच विद्यमान गहरे सांस्कृतिक संबंधों का सशक्त प्रतीक है।

सचिव  दीपक कुमार ने प्रस्ताव रखा कि इंडोनेशिया गणराज्य के दूतावास के सहयोग से हरिद्वार स्थित उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम, इंडोनेशिया के विश्वविद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली तथा सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन संपादित कर सकता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular