Friday, June 26, 2026
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उत्तराखंड में अवैध हथियारों के नेटवर्क पर STF का शिकंजा, 6 माह में 25 सप्लायर गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड में अवैध हथियारों की बढ़ती बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की लगातार कार्रवाई में न केवल अवैध हथियारों की तस्करी का खुलासा हुआ है, बल्कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस के जरिए हथियारों की खरीद-फरोख्त करने वाले संगठित गिरोह का भी पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है।

एसटीएफ के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत से राज्यभर में अवैध हथियारों और फर्जी लाइसेंस के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पिछले छह महीनों के दौरान एसटीएफ ने 25 हथियार सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 40 अवैध हथियार और 483 कारतूस बरामद किए गए हैं। बरामद हथियारों में 21 पिस्टल, 10 तमंचे, पांच ऑटोमैटिक पंप एक्शन गन, दो राइफल और दो रिवॉल्वर शामिल हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि उत्तराखंड में अवैध हथियार दो प्रमुख माध्यमों से पहुंच रहे हैं। पहला, बिना लाइसेंस के हथियारों की सीधी तस्करी और दूसरा, फर्जी शस्त्र लाइसेंस के माध्यम से कानूनी हथियारों को अवैध तरीके से हासिल करना। इसी कारण अब यह नेटवर्क उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब तक जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है।

एसटीएफ की कुमाऊं यूनिट ने हाल ही में फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट के कथित मास्टरमाइंड सदानंद शर्मा, निवासी शाहजहांपुर, को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उसके बैंक खातों में अवैध कारोबार से जुड़े लगभग 1.70 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है। मामले में वित्तीय लेन-देन और अन्य राज्यों से जुड़े नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि युवाओं में अवैध हथियार रखने और सोशल मीडिया पर उनका प्रदर्शन करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कई मामलों में हर्ष फायरिंग और आपराधिक गतिविधियों के लिए भी ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फर्जी ऑल इंडिया शस्त्र लाइसेंस तैयार कर अन्य राज्यों से हथियार खरीदकर उन्हें उत्तराखंड में ट्रांसफर करने का नेटवर्क सक्रिय है, जिस पर एसटीएफ लगातार कार्रवाई कर रही है।

एसटीएफ का कहना है कि अवैध हथियारों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही फर्जी लाइसेंस तैयार करने वाले गिरोहों और उनके आर्थिक स्रोतों की भी गहन जांच की जा रही है।

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