युवाओं के नाम पत्र जारी कर कहा— देशहित, छात्रों के भविष्य और लोकतांत्रिक माहौल को ध्यान में रखकर लिया निर्णय; प्रदर्शनकारी संगठनों ने बताया आंदोलन की बड़ी जीत
नई दिल्ली। नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। युवाओं के नाम जारी एक पत्र में उन्होंने कहा कि देश में बने हालात, छात्रों के भविष्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया है।
पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठन नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। मंत्री के इस्तीफे की घोषणा के बाद आंदोलनकारी संगठनों ने इसे अपनी बड़ी सफलता बताया।

युवाओं के नाम पत्र में कही यह बात
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन शिक्षा, छात्र हित और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने लिखा कि भारत के युवाओं की आकांक्षाओं और सपनों का सम्मान करना उनकी प्राथमिकता रही है और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर उनके लिए गौरव का विषय रहा।
उन्होंने कहा कि देश की एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि छात्र कानूनी विवादों में उलझने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें। इसी सोच के साथ उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
नीट परीक्षा का भी किया उल्लेख
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी। इसके बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि दोबारा आयोजित परीक्षा में 20 लाख से अधिक छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन तथा अभिभावकों के सहयोग से व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गईं।
‘युवाशक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत’
पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत की युवाशक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उनका हमेशा प्रयास रहा कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों की परिस्थितियों ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत किया, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि है।
प्रदर्शनकारी संगठनों ने बताया लोकतंत्र की जीत
इस्तीफे के बाद प्रदर्शन कर रहे संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि छात्रों की आवाज़ सुनी गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि आंदोलन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं होगा और अन्य मांगों पर भी सरकार से लिखित आश्वासन की अपेक्षा है।
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार के साथ अगली वार्ता में शेष मांगों पर चर्चा होगी। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने देशभर में शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकालने की अपील की।
विपक्ष भी रहा सक्रिय
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों से मुलाकात की थी। उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
फिलहाल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार के अगले कदम और शिक्षा मंत्रालय में नए नेतृत्व को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

