Sunday, April 5, 2026
Google search engine
Homeराज्य समाचारउत्तराखण्डचिकित्सकीय लापरवाही पर बड़ा एक्शन, मैक्स अस्पताल पर ₹10 लाख का जुर्माना

चिकित्सकीय लापरवाही पर बड़ा एक्शन, मैक्स अस्पताल पर ₹10 लाख का जुर्माना

देहरादून

निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही लापरवाही पर उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने सख्त रुख अपनाते हुए नजीर पेश की है। मसूरी डायवर्जन रोड स्थित मैक्स अस्पताल में मरीज के गलत इलाज और गंभीर चिकित्सकीय चूक के मामले में काउंसिल ने अस्पताल प्रबंधन पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। साथ ही, मुख्य उपचारकर्ता डॉक्टर का पंजीकरण दो महीने के लिए निलंबन कर दिया गया है।

इलाज के दौरान महिला की मौत से जुड़ा मामला

यह मामला 4 अप्रैल 2025 का है। कर्नल अमित कुमार दोउली की पत्नी बिन्देश्वरी देवी को न्यूरोसर्जरी वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद डॉक्टरों ने समय पर आवश्यक उपचार नहीं किया और तय मेडिकल प्रोटोकॉल की अनदेखी की गई।

शिकायत में कहा गया कि ‘गोल्डन ऑवर’ में सही निर्णय न लिए जाने के कारण मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उनकी मौत हो गई।

मेडिकल काउंसिल की जांच में गंभीर लापरवाही साबित

उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल की नैतिकता, अनुशासन एवं पंजीकरण समिति ने मामले की विस्तृत जांच की। मेडिकल रिकॉर्ड, ट्रीटमेंट नोट्स और सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा के बाद समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इलाज में घोर उपेक्षा बरती गई।

जांच में सामने आया कि डॉ. आनंद मोहन ठाकुर, डॉ. मुकेश बिष्ट और डॉ. अपूर्वा रंजन द्वारा निर्धारित चिकित्सकीय मानकों का पालन नहीं किया गया।

डॉक्टर सस्पेंड, अस्पताल पर मुआवजा

काउंसिल ने मुख्य उपचारकर्ता डॉ. आनंद मोहन ठाकुर (रजिस्ट्रेशन नंबर 8540) का पंजीकरण दो माह के लिए निलंबित कर दिया है। इस अवधि में वे किसी भी अस्पताल या क्लिनिक में प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।साथ ही, संस्थागत जिम्मेदारी तय करते हुए मैक्स अस्पताल को मृतका के पति को ₹10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

मैक्स अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि, “हमें अभी तक मेडिकल काउंसिल का आदेश आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश की प्रति मिलने के बाद उसका अध्ययन कर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।”

निजी अस्पतालों के लिए कड़ा संदेश

उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल का यह फैसला राज्य के सभी निजी अस्पतालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह स्पष्ट करता है कि इलाज में लापरवाही और मरीजों की जान से खिलवाड़ पर अब सख्त कार्रवाई तय है और मरीजों के अधिकार सर्वोपरि हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular