Wednesday, February 11, 2026
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वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार का मामला उजागर

देहरादून।

उत्तराखंड में कथित भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। इस बार मामला उत्तराखंड वन विभाग और उत्तराखंड वन विकास निगम से जुड़ा है, जहां वीडियो कॉन्फ्रेंस (वीसी) के माध्यम से आयोजित बैठक के बावजूद देहरादून के एक पांच सितारा होटल में लाखों रुपये खर्च किए जाने का आरोप लगा है।
प्रकरण के अनुसार, मुख्य वन संरक्षक (उपयोग, गैर-प्रकाष्ठ वन उपज एवं आजीविका), देहरादून द्वारा 24 अक्टूबर 2024 को उत्तराखंड वन विकास निगम से संबंधित लंबित विषयों पर विचार-विमर्श के लिए 25 अक्टूबर 2024 को बैठक आयोजित किए जाने की सूचना दी गई थी। यह बैठक हॉफ (हॉफ) की अध्यक्षता में वन विभाग के कार्यालय, वन भवन स्थित वीसी कक्ष में हाई-ब्रिड वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रस्तावित थी।
इस बैठक से संबंधित पत्र पर न तो कोई पत्रांक अंकित है और न ही उत्तराखंड वन विकास निगम के कार्यालय में उसकी विधिवत प्राप्ति दर्ज है। इसके अलावा पत्र पर किसी भी उच्च अधिकारी की मार्किंग भी नहीं पाई गई है। इसके बावजूद तत्कालीन प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड वन विकास निगम गिरिजा शंकर पाण्डे द्वारा इसी पत्र के आधार पर देहरादून के राजपुर रोड स्थित पांच सितारा होटल हयात सेंट्रिक को 1,64,787 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बैठक वन विभाग के कार्यालय में स्थित वीसी कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित की गई थी और अधिकारियों की उपस्थिति भी केवल ऑनलाइन माध्यम से होनी थी, तो ऐसे में पांच सितारा होटल में भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किस आधार पर किया गया।
मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारों का कहना है कि यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है। यह भी सवाल उठ रहा है कि बिना विधिवत पत्राचार और अनुमोदन के भुगतान कैसे किया गया।
इस पूरे प्रकरण को देवभूमि उत्तराखंड में नौकरशाही की कथित मनमानी का एक ज्वलंत उदाहरण बताया जा रहा है। मांग की जा रही है कि शासन स्तर पर इस मामले का संज्ञान लिया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लग सके। इस सम्बन्ध में जब हमनें उत्तराखण्ड वन विकास निगम की एमडी नीना ग्रेवाल से उनका पक्ष जानना चाहा तो उनके दोनों नंबर स्विच आफ़ थे।

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