Wednesday, May 20, 2026
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चारधाम यात्रा के नाम पर साइबर ठगी, बिहार से संचालित हो रहे फर्जी बुकिंग रैकेट

देहरादून: 

एसएसपी, एसटीएफ अजय सिंह के नेतृत्व में उत्तराखंड एसटीएफ ने चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को निशाना बनाने वाले साइबर ठगी गिरोहों का बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि केदारनाथ हेली सेवा और यात्रा बुकिंग के नाम पर सबसे अधिक साइबर ठगी बिहार के नवादा, पटना, गया और बिहारशरीफ जिलों से संचालित गिरोहों द्वारा की जा रही है। इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फेक आईपी एड्रेस और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियां चिन्हित हुई हैं।

एसटीएफ के अनुसार, चारधाम यात्रा शुरू होते ही साइबर अपराधियों ने फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया पेज और मोबाइल नंबरों के जरिए श्रद्धालुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। सबसे अधिक शिकायतें केदारनाथ हेली सेवा की ऑनलाइन बुकिंग को लेकर मिलीं, जहां ठग कम कीमत और तत्काल टिकट उपलब्ध कराने का झांसा देकर लोगों से ऑनलाइन भुगतान करा रहे थे। इसके अलावा फर्जी होटल और गेस्ट हाउस बुकिंग के नाम पर भी श्रद्धालुओं से ठगी की गई।

जांच के दौरान एसटीएफ ने अब तक 200 से अधिक फर्जी वेबसाइट, फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम अकाउंट और बुकिंग लिंक बंद कराए हैं। साथ ही साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे 50 से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबर भी ब्लॉक किए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये गिरोह संगठित तरीके से सोशल मीडिया विज्ञापनों और फर्जी ट्रैवल पोर्टलों के माध्यम से यात्रियों तक पहुंच बना रहे थे।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि कई फर्जी वेबसाइट सरकारी पोर्टल जैसी दिखाई देती हैं, जिससे श्रद्धालु आसानी से धोखे का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि हेली सेवा, होटल या यात्रा पंजीकरण केवल अधिकृत पोर्टल से ही कराएं। उत्तराखंड सरकार ने केदारनाथ हेली सेवा बुकिंग के लिए केवल को अधिकृत किया है।

एसटीएफ ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि किसी भी अनजान मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया लिंक या व्हाट्सएप संदेश के जरिए भुगतान न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर अपराधियों के खिलाफ उत्तराखंड एसटीएफ “ऑपरेशन प्रहार” के तहत लगातार कार्रवाई कर रही है। एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, बीते चार महीनों में पीड़ितों के लगभग 10 करोड़ रुपये बचाए गए हैं। इसके अलावा 147 अंतरराज्यीय लिंक ऑपरेटरों और 27 फर्जी मोबाइल धारकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी की गई है।

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