Wednesday, March 25, 2026
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उत्तराखंड में जीआई उत्पादों की पहचान व ब्रांडिंग में नाबार्ड की सक्रिय भूमिका की सराहना

नाबार्ड ने किया क्षेत्रीय सलाहकार समिति बैठक एवं जीआई कार्यशाला का आयोजन

– कार्यशाला में विभिन्न विभागों और योजनाओं के बीच अभिसरण पर जोर दिया गया ताकि जीआई आधारित ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके

– पद्मश्री डॉ. राजनिकांत (GI मैन ऑफ इंडिया) ने जीआई पंजीकरण, अधिकृत उपयोगकर्ता जोड़ने एवं पोस्ट-जीआई रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया

– उत्तराखंड में नाबार्ड की सक्रिय भूमिका की सराहना की, जिसमें जीआई योग्य उत्पादों की पहचान, पंजीकरण, ब्रांडिंग एवं विपणन के प्रयास शामिल हैं

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा उत्तराखंड क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून ने दूसरी क्षेत्रीय सलाहकार समिति (RAC) बैठक एवं जीआई कार्यशाला का आयोजन 30 दिसंबर 2025 को अपने आईटी पार्क स्थित कार्यालय में किया। बैठक का विषय था – “ग्रामीण समृद्धि हेतु जीआई की क्षमता का उपयोग: ब्रांडिंग, विपणन एवं मूल्य संवर्धन के लिए पोस्ट-जीआई रणनीतियाँ।”

बैठक का शुभारंभ श्री पंकज यादव, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड द्वारा किया गया। इस अवसर पर SLBC, UKSRLM, KVIC/KVIB, कृषि एवं उद्यान विभाग, IIT रुड़की, IIM काशीपुर, UKSTCB, ग्रामीण विकास विभाग, NGOs सहित कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उत्तराखंड टी बोर्ड, DDMs एवं चैनल पार्टनर्स ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की।

कार्यक्रम की विशेषता रही पद्मश्री डॉ. राजनिकांत (GI मैन ऑफ इंडिया) का ऑनलाइन तकनीकी सत्र। उन्होंने जीआई पंजीकरण, अधिकृत उपयोगकर्ता जोड़ने एवं पोस्ट-जीआई रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया और उत्तराखंड में नाबार्ड की सक्रिय भूमिका की सराहना की, जिसमें जीआई योग्य उत्पादों की पहचान, पंजीकरण, ब्रांडिंग एवं विपणन के प्रयास शामिल हैं।

बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और स्टार्टअप्स की भूमिका पर सुझाव दिए कि वे जीआई उत्पादों के प्रचार, ब्रांडिंग और बाजार विस्तार में कैसे योगदान दे सकते हैं। बैठक में विभिन्न विभागों और योजनाओं के बीच अभिसरण पर भी जोर दिया गया ताकि जीआई आधारित ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके।

नाबार्ड ने यह संकल्प दोहराया कि वह ग्रामीण समुदायों को जीआई संवर्धन, ब्रांडिंग सहायता, प्रशिक्षण और बाजार संपर्क के माध्यम से सशक्त करेगा, जिससे उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिल सके।

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